कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप और देश भर से रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमीं की खबरों के बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. भारत सरकार ने रेमडेसिविर बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिया है कि वो इस दवा का उत्पादन बढ़ाएं और कीमतों को भी कम करें.

1. कोरोना के इलाज में काम आने वाली Remdesivir का उत्पादन बढ़ेगा, कीमत भी घटाएगी सरकार

नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप और देश भर से रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी की खबरों के बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. भारत सरकार ने रेमडेसिविर बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिया है कि वो इस दवा का उत्पादन बढ़ाएं और कीमतों को भी कम करें. इसके लिए केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने दवा उत्पादक कंपनियों के साथ लगातार दो दिनों तक बैठक की और इससे जुड़े निर्देश जारी किए. सरकार ने कंपनियों से कहा है कि वो न सिर्फ रेमडेसिविर का उत्पादन बढ़ाएं, बल्कि उसकी कीमत भी घटाएं.

मौजूदा समय में भारत में सात कंपनियां मिलकर 38.80 लाख डोज रेमडेसिविर (Remdesivir) का उत्पादन करती हैं. सरकार ने 6 कंपनियों द्वारा सात अन्य साइट्स पर 10 लाख डोज के अतिरिक्त उत्पादन को मंजूरी दी है. इसके अलावा 30 लाख डोज प्रति माह के हिसाब से एक अन्य कंपनी को रेमडेसिविर के उत्पादन के लिए कहा गया है. इसके बाद भारत में इस दवा के 78 लाख डोज हर महीने के हिसाब से उत्पादन होगा. 

भारत सरकार ने 11 अप्रैल को रेमडेसिविर (Remdesivir) के निर्यात पर रोक लगा दी है. सरकार ने कहा है कि रेमडेसिविर बाहर भेजने की जगह भारत के घरेलू उपयोग के लिए मौजूद रहना चाहिए. सरकार के इस कदम के बाद रेमडेसिविर की 4 लाख डोज जो बाहर जा रही थी, उन्हें रोक लिया गया और घरेलू बाजार की तरफ भेज दिया गया. इसके अलावा सेज या ईओयू में बन रही रेमडेसिविर से भी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए कहा गया है. 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद रेमडेसिविर बनाने वाली कंपनियों ने खुद ब खुद इसकी कीमत घटा दी थी और 3500 रुपये के हिसाब से दवा के दाम फिक्स्ड कर दिए थे. ताकी कोरोना के खिलाफ जंग में भारत जीत सके. सरकार ने रेमडेसिविर बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिया है कि वो पहले अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों को रेमडेसिविर की आपर्ति सुनिश्चित करें. सरकार ने अपनी एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वो रेमडेसिविर दवा की काला बाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए. इस पूरे मामले पर एनपीपीए (National Pharmaceutical Pricing Authority) भी नजर रख रही है. 

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