रेमडेसिविर इंजेक्शन (Remdesivir Injection) की मारामारी गुजरात से ज्यादा महाराष्ट्र (Maharashtra) में है, जबकि रेमडेसिविर के कुल उत्पादन का करीब 70 फीसदी महाराष्ट्र को ही मिल रहा है. बाकी 30 फीसदी हिस्सा ही दूसरे राज्यों को जा रहा है.

1. कोरोना के कहर के बीच रेमडेसिविर की किल्लत, गुजरात-महाराष्ट्र में इंजेक्शन की कमी को लेकर उठे ये बड़े सवाल

देश में कोरोनावायरस (Coronavirus) के बढ़ते मामलों के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन (Remdesivir Injection) की चर्चा इस दिनों पूरे देश की सुर्खियों में है. इस दवा का इस्तेमाल कोरोना के गंभीर मरीजों पर किया जा रहा है, यही वजह है कि इसकी किल्लत देश के कई राज्यों में हो गई है, खासतौर से गुजरात और महाराष्ट्र (Gujarat and Maharashtra) में रेमडेसिविर की कमी से नाराज लोग सड़कों पर हैं और कालाबाजारी चरम पर. सूरत में दवा की दुकानों के बाहर तपती गर्मी में जीवन रक्षक इंजेक्शन रेमडेसिविर पाने के लिए लंबी-लंबी कतारों में भारी भीड़ देखी गई.

भारत में कोरोनावायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बाद रेमडेसिविर की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है और इसके साथ ही बढ़ा है रेमडेसिविर का अवैध भंडारण (Illegal Storage of Remdesivir) तो साथ में रेमडेसिविर की कालाबाजारी. बताया जा रहा है कि ब्लैक मार्केटिंग के चलते ही रेमडेसिविर बाजार से गायब हो गई है. महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में रेमडेसिविर की कमी की रिपोर्ट हर दिन सामने आ रही है.

रेमडेसिविर के लिए पुलिस की जगह-जगह छापेमारी

आलम ये है कि अब पुलिस देश में जगह-जगह छापेमारी कर रही है. वडोदरा (Vadodara) में रेमडेसिविर की ब्लैक मार्केटिंग करने वाले दो लोग इंजेक्शन सहित गिरफ्तार भी किए गए हैं. ना सिर्फ वडोदरा बल्कि गुजरात के कई शहरों में रेमडेसिविर की किल्लत बड़ी समस्या बन गई है. सूरत में तो मेडिकल स्टोर पर इंजेक्शन पाने के लिए लाइनें लगी हैं, लेकिन मिल नहीं रहा. इस बीच सूरत के लोगों ने बीजेपी दफ्तर के बाहर भी इंजेक्शन के लिए लंबी कतार भी लगाई, क्योंकि यहां इंजेक्शन फ्री में दिया गया.

रेमडेसिविर के कुल उत्पादन का 70 फीसदी महाराष्ट्र को

हालांकि ये बात चौंकाती है कि जिस इंजेक्शन के लिए शहर में मारामारी है, किसी भी मेडिकल स्टोर पर नहीं मिल रहा, ब्लैक में भी 40 से 50 हजार में बिक रहा है, वो फ्री में बीजेपी कार्यालय पर कैसे मिल रहा है? इस मामले ने गुजरात की सियासत गरमा दी है. सवाल पूछे जा रहे हैं कि इंजेक्शन का इतना स्टॉक आया कहां से, लेकिन इंजेक्शन की मारामारी गुजरात से ज्यादा महाराष्ट्र में है, जबकि रेमडेसिविर के कुल उत्पादन का करीब 70 फीसदी महाराष्ट्र को ही मिल रहा है. बाकी 30 फीसदी हिस्सा ही दूसरे राज्यों को जा रहा है.

फिर भी महाराष्ट्र में इंजेक्शन स्टॉक में नहीं है. मुंबई के घाटकोपर में तो एक मेडिकल स्टोर में छापेमारी कर 13 इंजेक्शन जब्त किए गए. यहां लोगों ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA को शिकायत की थी कि इंजेक्शन उपलब्ध होने के बाद भी दुकानदार आनाकानी कर रहा है, लिहाजा राज्य सरकार ने अब कई सख्त फैसले लिए हैं.

रेमडेसिविर के प्रोडक्शन में कमी भी एक मुख्य वजह

वैसे सप्लाई में कमी की एक वजह उत्पादन में आई गिरावट भी है. इस साल 2 से 3 महीनों के लिए रेमडेसिविर का उत्पादन नहीं के बराबर हुआ. पिछले दिसंबर में कई कंपनियों और निर्माताओं के पास काफी स्टॉक पड़ा रह गया. उन्होंने बिक्री में बढ़ोतरी का अनुमान लगाते हुए अपना उत्पादन बढ़ाया था, लेकिन नवंबर-दिसंबर में कोरोना के मामलों में कमी होने के कारण इसकी मांग में भी गिरावट आई, जिस वजह से उत्पादन पर रोक लगाई गई और अब कोरोना केस बढ़ते ही सप्लाई प्रभावित हो गई है.

हालांकि इस किल्लत की बड़ी वजह एक और है- इंजेक्शन पर विदेशी नियंत्रण. टीवी9 भारतवर्ष इस मुद्दे पर मुहिम चल रहा है- विदेशी कंट्रोल हटाओ, रेमडेसिविर इंजेक्शन लाओ, क्योंकि अब फिक्र है कोरोना मरीजों पर इस्तेमाल हो रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन की, जिसकी कमी से देश में हाहाकार मच गया है. हम दवा की किल्लत से जुड़ी हर छोटी बड़ी खबरें हर दिन दिखा रहे हैं, साथ ही कह रहे हैं कि सरकार इसे कंपलसरी लिस्ट में डाले ताकि देश में तुरंत प्रोडक्शन भी बढ़े और कालाबाजारी भी रुके.